PM Vishwakarma Yojana Basket Mat Broom Maker: Complete Guide for Basket, Mat and Broom Weavers (2026)

October 28, 2026
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PM Vishwakarma Yojana Basket Mat Broom Maker के अंतर्गत बुनकरों को केंद्र सरकार द्वारा मान्यता, कौशल प्रशिक्षण, औजार सहायता और रियायती ब्याज पर ऋण प्रदान किया जाता है। यह योजना विशेष रूप से उन पारंपरिक कारीगरों के लिए है जो बांस, बेंत, घास और कॉयर फाइबर से हाथ के औजारों की सहायता से टोकरी, चटाई और झाड़ू बनाते हैं। PM Vishwakarma Yojana Basket Mat Broom Maker उन पारिवारिक व्यवसायों को औपचारिक पहचान दिलाने का माध्यम है जो पीढ़ियों से इस शिल्प से जुड़े हुए हैं, लेकिन अब तक संगठित क्षेत्र की वित्तीय और तकनीकी सहायता से वंचित रहे हैं।

Overview

प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना की शुरुआत 17 सितंबर 2023 को हुई थी और यह वित्त वर्ष 2023-24 से 2027-28 तक पांच वर्षों के लिए 13,000 करोड़ रुपये के कुल परिव्यय के साथ लागू है। इस योजना का उद्देश्य गुरु-शिष्य परंपरा या पारिवारिक आधार पर हाथ और औजारों से काम करने वाले पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों को सशक्त बनाना है, ताकि उनके उत्पादों की गुणवत्ता और पहुंच में सुधार हो सके और वे घरेलू तथा वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं से जुड़ सकें। योजना के तहत कुल 18 पारंपरिक व्यापारों को शामिल किया गया है, जिनमें “टोकरी/चटाई/झाड़ू निर्माता/कॉयर बुनकर” भी एक महत्वपूर्ण व्यापार है।

यह योजना पूरी तरह से डिजिटल प्रक्रिया के माध्यम से संचालित होती है। पात्रता की जांच के बाद लाभार्थी को प्रमाण पत्र और पहचान पत्र, निःशुल्क कौशल प्रशिक्षण, औजारों के लिए ई-वाउचर, बिना जमानत के ऋण और डिजिटल लेन-देन के लिए प्रोत्साहन प्रदान किया जाता है। इस योजना का क्रियान्वयन सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय (MSME) के अंतर्गत आता है और पंजीकरण की पूरी प्रक्रिया कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) के माध्यम से आधार बायोमेट्रिक सत्यापन के साथ की जाती है।

Basket weaver making baskets by hand under PM Vishwakarma Yojana

Who Is a Basket Mat Broom Maker Under the Scheme

इस योजना के अंतर्गत “बास्केट/मैट/ब्रूम मेकर/कॉयर विवर” की परिभाषा में वे कारीगर शामिल हैं जो पारंपरिक रूप से हाथ से बुनाई का कार्य करते हैं। इसमें बांस, बेंत (cane), घास और कॉयर फाइबर जैसे प्राकृतिक कच्चे माल का उपयोग करके टोकरी, चटाई, झाड़ू और अन्य संबंधित उत्पाद बनाए जाते हैं। यह कार्य मुख्य रूप से हाथ के औजारों की सहायता से किया जाता है और आमतौर पर यह पीढ़ी-दर-पीढ़ी चलने वाला पारिवारिक व्यवसाय होता है।

योजना की शर्तों के अनुसार, केवल वही कारीगर पात्र हैं जो स्वयं इस शिल्प में सक्रिय रूप से संलग्न हैं और असंगठित क्षेत्र में स्वरोजगार के आधार पर काम कर रहे हैं। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि केवल फैक्ट्री या मशीन-आधारित उत्पादन इस योजना के अंतर्गत कवर नहीं किया जाता है। योजना का लाभ केवल उन्हीं कारीगरों को मिल सकता है जो पारंपरिक तरीकों से हाथ से बुनाई और निर्माण का कार्य करते हैं।

PM Vishwakarma Yojana Basket Mat Broom Maker — Benefits, Toolkit and Loan for Weavers

इस योजना के अंतर्गत बुनकरों को कई प्रकार के वित्तीय और गैर-वित्तीय लाभ प्रदान किए जाते हैं। ये लाभ उनकी उत्पादकता बढ़ाने, उत्पाद की गुणवत्ता सुधारने और बाजार तक पहुंच बनाने में सहायक होते हैं।

लाभ का प्रकारविवरण
पहचान (Recognition)पीएम विश्वकर्मा प्रमाण पत्र और आईडी कार्ड, जो कारीगर को औपचारिक पहचान दिलाता है
कौशल प्रशिक्षण (Skilling)5-7 दिन (40 घंटे) का बेसिक प्रशिक्षण और 15 दिन (120 घंटे) का एडवांस प्रशिक्षण; प्रशिक्षण के दौरान प्रति दिन 500 रुपये का स्टाइपेंड
औजार प्रोत्साहन (Toolkit Incentive)बेसिक प्रशिक्षण के शुरुआत पर 15,000 रुपये का ई-वाउचर (e-voucher)
ऋण सहायता (Credit Support)बिना जमानत के ऋण: पहली किस्त 1,00,000 रुपये (18 महीने) और दूसरी किस्त 2,00,000 रुपये (30 महीने), 5% रियायती ब्याज दर पर
डिजिटल प्रोत्साहनप्रति डिजिटल लेन-देन 1 रुपये का प्रोत्साहन, अधिकतम 100 लेन-देन प्रति माह
विपणन सहायता (Marketing)गुणवत्ता प्रमाणन, ब्रांडिंग, GeM जैसे ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर ऑनबोर्डिंग और व्यापार मेलों में भागीदारी

योजना के तहत दिए जाने वाले ऋण की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि यह पूरी तरह से बिना जमानत (collateral-free) है। पहली किस्त के रूप में 1 लाख रुपये का ऋण बेसिक प्रशिक्षण पूरा करने के बाद उपलब्ध होता है, जिसे 18 महीनों में चुकाना होता है। यदि लाभार्थी पहली किस्त का भुगतान सही तरीके से करता है और डिजिटल लेन-देन अपनाता है, तो उसे 2 लाख रुपये की दूसरी किस्त मिल सकती है, जिसकी अवधि 30 महीने है।

Modern Tools for Weavers

15,000 रुपये के टूलकिट ई-वाउचर का उपयोग बुनकर अपने पारंपरिक औजारों को आधुनिक और अधिक कुशल बनाने के लिए कर सकते हैं। इस राशि से ऐसे औजार खरीदे जा सकते हैं जो उत्पादन की गति और गुणवत्ता दोनों को बढ़ाएं। उपयुक्त औजारों में बांस और बेंत को चीरने तथा काटने के लिए उन्नत कटिंग टूल्स, बुनाई के लिए मजबूत फ्रेम और लूम, तथा उत्पादों को अंतिम रूप देने और बांधने के लिए आवश्यक सामग्री शामिल है।

यह ई-वाउचर पंजीकृत मोबाइल नंबर पर डिजिटल रूप में प्रदान किया जाता है और इसे इंडिया पोस्ट के माध्यम से लाभार्थी के घर तक पहुंचाए गए चयनित टूलकिट के विरुद्ध भुनाया जा सकता है। आधुनिक औजारों के उपयोग से न केवल उत्पादन में तेजी आती है, बल्कि उत्पादों की फिनिशिंग भी बेहतर होती है, जिससे बाजार में उनकी कीमत बढ़ सकती है।

Eligibility

इस योजना का लाभ लेने के लिए निम्नलिखित पात्रता शर्तों को पूरा करना आवश्यक है:

  • आयु सीमा: पंजीकरण की तिथि पर आवेदक की आयु कम से कम 18 वर्ष होनी चाहिए।
  • पारिवारिक सीमा: एक परिवार से केवल एक ही सदस्य इस योजना का लाभ ले सकता है। परिवार में पति, पत्नी और अविवाहित बच्चे शामिल हैं।
  • सरकारी नौकरी से प्रतिबंध: आवेदक या उसके परिवार का कोई भी सदस्य सरकारी नौकरी में नहीं होना चाहिए।
  • पिछले ऋण की स्थिति: आवेदक या उसके परिवार ने पिछले 5 वर्षों में पीएमईजीपी (PMEGP), पीएम स्वनिधि (PM SVANidhi) या मुद्रा (Mudra) जैसी समान ऋण आधारित योजनाओं के तहत ऋण नहीं लिया होना चाहिए।
  • सक्रिय भागीदारी: आवेदक को पंजीकरण के समय इस पारंपरिक व्यापार में सक्रिय रूप से कार्यरत होना चाहिए और असंगठित क्षेत्र में स्वरोजगार के आधार पर काम कर रहा हो।

Documents Required

आवेदन प्रक्रिया शुरू करने से पहले निम्नलिखित दस्तावेजों को तैयार रखना आवश्यक है:

  • आधार कार्ड (Aadhaar Card)
  • आधार से लिंक मोबाइल नंबर (Aadhaar-linked mobile number)
  • बैंक खाता पासबुक या विवरण (Bank account passbook/statement)
  • राशन कार्ड (Ration Card) – पारिवारिक विवरण के सत्यापन के लिए
  • पासपोर्ट साइज फोटो (Passport size photo)

ये दस्तावेज सीएससी (CSC) पर ऑपरेटर द्वारा स्कैन और अपलोड किए जाते हैं। सुनिश्चित करें कि सभी दस्तावेज स्पष्ट और वैध हों, क्योंकि अस्पष्ट दस्तावेजों के कारण आवेदन में देरी या अस्वीकृति हो सकती है।

How to Apply via CSC

पीएम विश्वकर्मा योजना के लिए आवेदन केवल कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) के माध्यम से ही किया जा सकता है, क्योंकि इसमें आधार बायोमेट्रिक सत्यापन आवश्यक होता है जो केवल सीएससी पर उपलब्ध विशेष उपकरणों से ही संभव है। आवेदन की प्रक्रिया निम्नलिखित है:

  1. निकटतम CSC पर जाएं: अपने नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर पर जाएं और अपने सभी आवश्यक दस्तावेज साथ लेकर जाएं।
  2. आधार बायोमेट्रिक सत्यापन: सीएससी ऑपरेटर आपके आधार नंबर को सत्यापित करेगा और बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण (फिंगरप्रिंट या आईरिस स्कैन) करेगा। आधार से लिंक मोबाइल नंबर पर ओटीपी भी सत्यापित किया जाएगा।
  3. आर्टिजन रजिस्ट्रेशन फॉर्म भरना: ऑपरेटर पोर्टल पर आपका व्यक्तिगत विवरण, पते का विवरण, परिवार का विवरण (राशन कार्ड के अनुसार), बैंक खाता विवरण और व्यापार (टोकरी/चटाई/झाड़ू निर्माता) से संबंधित जानकारी भरेगा।
  4. दस्तावेज अपलोड करना: आवश्यक दस्तावेजों को स्कैन और अपलोड किया जाएगा।
  5. आवेदन जमा करना: फॉर्म भरने और दस्तावेज अपलोड करने के बाद आवेदन जमा किया जाएगा। आपको पंजीकृत मोबाइल नंबर पर एक पावती/संदर्भ संख्या प्राप्त होगी।

आवेदन जमा करने के बाद, यह तीन-स्तरीय सत्यापन प्रक्रिया से गुजरता है: पहले ग्राम पंचायत या शहरी स्थानीय निकाय (ULB) स्तर पर सत्यापन, फिर जिला कार्यान्वयन समिति (District Implementation Committee) द्वारा जांच और अंत में राज्य स्तरीय स्क्रीनिंग कमेटी द्वारा अंतिम अनुमोदन। यह ध्यान रखें कि योजना के तहत स्वीकृति की कोई गारंटी नहीं है; सत्यापन के बाद ही आगे की प्रक्रिया बढ़ती है और ऋण देने का अंतिम निर्णय संबंधित बैंक का होता है।

After Approval: Certificate, Training, Toolkit and Loan

आवेदन स्वीकृत होने के बाद लाभार्थी को योजना के लाभ क्रमबद्ध रूप से प्राप्त होते हैं:

  • प्रमाण पत्र और आईडी कार्ड: सबसे पहले पीएम विश्वकर्मा प्रमाण पत्र और आईडी कार्ड जारी किया जाता है, जिसे पोर्टल से डाउनलोड किया जा सकता है। यह औपचारिक पहचान है जो आगे के सभी लाभों का द्वार खोलती है।
  • बेसिक प्रशिक्षण: 5 से 7 दिन (40 घंटे) का निःशुल्क बेसिक कौशल प्रशिक्षण दिया जाता है, जिसके दौरान प्रति दिन 500 रुपये का स्टाइपेंड सीधे बैंक खाते में डीबीटी (DBT) के माध्यम से भेजा जाता है।
  • टूलकिट ई-वाउचर: बेसिक प्रशिक्षण के शुरुआत में 15,000 रुपये का ई-वाउचर पंजीकृत मोबाइल नंबर पर भेजा जाता है, जिसे औजार खरीदने के लिए भुनाया जा सकता है।
  • एडवांस प्रशिक्षण (वैकल्पिक): इच्छुक लाभार्थी 15 दिन (120 घंटे) का एडवांस प्रशिक्षण भी ले सकते हैं, जिसके लिए भी 500 रुपये प्रति दिन का स्टाइपेंड मिलता है।
  • ऋण: बेसिक प्रशिक्षण के बाद पहली किस्त के रूप में 1 लाख रुपये का ऋण बैंक के माध्यम से प्राप्त किया जा सकता है। सफल पुनर्भुगतान और डिजिटल लेन-देन अपनाने पर दूसरी किस्त के रूप में 2 लाख रुपये का ऋण उपलब्ध होता है।

Common Mistakes

आवेदन के दौरान कुछ सामान्य गलतियों से बचना चाहिए:

  • गलत व्यापार का चयन: यह सुनिश्चित करें कि आवेदन में व्यापार का चयन “बास्केट/मैट/ब्रूम मेकर/कॉयर विवर” के रूप में ही किया जाए। यदि आप वास्तव में इस शिल्प में संलग्न नहीं हैं और गलत व्यापार चुनते हैं, तो सत्यापन के दौरान आवेदन अस्वीकृत हो सकता है।
  • अपूर्ण दस्तावेज: आधार और बैंक खाते का विवरण एक समान होना चाहिए। यदि नाम या अन्य विवरण में अंतर है, तो आवेदन में समस्या आ सकती है।
  • पारिवारिक सदस्यों की जानकारी में त्रुटि: राशन कार्ड के अनुसार पारिवारिक विवरण सही ढंग से भरें, क्योंकि एक परिवार से केवल एक सदस्य को ही लाभ मिल सकता है। यदि किसी अन्य सदस्य ने पहले ही आवेदन किया है, तो दूसरा आवेदन अस्वीकृत हो सकता है।
  • पुराने ऋण की जानकारी न देना: यदि आपने पिछले 5 वर्षों में पीएमईजीपी, मुद्रा या पीएम स्वनिधि के तहत ऋण लिया है, तो आवेदन में इसका खुलासा करें। छिपाने पर आवेदन रद्द हो सकता है।
  • सीएससी के बाहर आवेदन का प्रयास: बायोमेट्रिक सत्यापन के कारण आवेदन केवल सीएससी के माध्यम से ही संभव है। स्वयं ऑनलाइन आवेदन करने का प्रयास न करें।

FAQs

1. क्या टोकरी, चटाई और झाड़ू बनाने वाले इस योजना के लिए पात्र हैं?

हां, “बास्केट/मैट/ब्रूम मेकर/कॉयर विवर” पीएम विश्वकर्मा योजना के अंतर्गत मान्यता प्राप्त 18 पारंपरिक व्यापारों में से एक है।

2. क्या मशीन से टोकरी बनाने वाले भी आवेदन कर सकते हैं?

नहीं, योजना केवल उन कारीगरों के लिए है जो हाथ के औजारों से पारंपरिक तरीके से निर्माण कार्य करते हैं। फैक्ट्री या पूर्णतः मशीन-आधारित उत्पादन इसके दायरे में नहीं आता।

3. आवेदन के लिए कहां जाना होगा?

आवेदन केवल कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) के माध्यम से ही किया जा सकता है, क्योंकि आधार बायोमेट्रिक सत्यापन अनिवार्य है।

4. क्या आवेदन के लिए कोई शुल्क देना होता है?

योजना के तहत पंजीकरण के लिए कोई आधिकारिक शुल्क नहीं है, हालांकि सीएससी अपनी सेवा के लिए मामूली शुल्क ले सकता है।

5. टूलकिट के 15,000 रुपये कैसे मिलते हैं?

बेसिक प्रशिक्षण के शुरुआत में यह राशि ई-वाउचर (e-voucher) के रूप में पंजीकृत मोबाइल नंबर पर भेजी जाती है, जिसे औजार खरीदने के लिए भुनाया जा सकता है।

6. क्या योजना के तहत मिलने वाला ऋण बिना जमानत का है?

हां, यह ऋण पूरी तरह से बिना जमानत (collateral-free) है और सरकार की ओर से क्रेडिट गारंटी प्रदान की जाती है।

7. पहली किस्त का ऋण कब मिलता है?

पहली किस्त के रूप में 1 लाख रुपये का ऋण बेसिक प्रशिक्षण पूरा करने के बाद ही उपलब्ध होता है।

8. दूसरी किस्त के लिए क्या शर्तें हैं?

दूसरी किस्त (2 लाख रुपये) के लिए पहली किस्त का सही तरीके से भुगतान, बैंक खाते का सामान्य होना और डिजिटल लेन-देन अपनाना या एडवांस प्रशिक्षण पूरा करना आवश्यक है।

9. क्या एक ही परिवार के दो सदस्य आवेदन कर सकते हैं?

नहीं, योजना के तहत एक परिवार से केवल एक ही सदस्य लाभ का पात्र है।

10. योजना की आधिकारिक वेबसाइट और हेल्पलाइन नंबर क्या है?

आधिकारिक पोर्टल https://pmvishwakarma.gov.in है और हेल्पलाइन नंबर 1800-267-7777 तथा 17923 हैं।

Official Resources

Conclusion

पीएम विश्वकर्मा योजना टोकरी, चटाई और झाड़ू बनाने वाले पारंपरिक बुनकरों के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर है, जो उन्हें न केवल औपचारिक पहचान दिलाती है, बल्कि आधुनिक औजार, कौशल प्रशिक्षण और रियायती ऋण के माध्यम से उनके व्यवसाय को सशक्त भी बनाती है। यदि आप इस शिल्प में सक्रिय रूप से संलग्न हैं और पात्रता शर्तों को पूरा करते हैं, तो अपने निकटतम सीएससी (CSC) पर जाकर आवेदन प्रक्रिया शुरू करें। याद रखें कि आवेदन की स्वीकृति सत्यापन प्रक्रिया पर निर्भर करती है और ऋण देने का अंतिम निर्णय संबंधित बैंक का होता है। सभी आधिकारिक जानकारी और अपडेट के लिए हमेशा pmvishwakarma.gov.in पोर्टल पर ही भरोसा करें।

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